शराब दुकानों के सामने खुलेआम नियमों की धज्जियां, चखना सेंटर बने अराजकता का अड्डा…

रायपुर। सरकार द्वारा शराब दुकानों के संचालन को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। आबकारी नियमों के अनुसार शराब दुकान से 50 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार की दुकान या चखना सेंटर संचालित नहीं किया जा सकता, लेकिन राजधानी रायपुर में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले पर आंख मूंदे बैठे नजर आ रहे हैं।

राजधानी में कई ऐसी देशी-विदेशी शराब दुकानें हैं, जहां दुकानों से सटी हुई अवैध चखना दुकानें धड़ल्ले से चल रही हैं। न इनके पास कोई वैध अनुमति है और न ही किसी तरह का लाइसेंस, इसके बावजूद इनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सूत्रों का दावा है कि इन अवैध चखना सेंटरों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते आबकारी विभाग और पुलिस कार्रवाई से बचते नजर आते हैं।
पंडरी मेन रोड बना अव्यवस्था का उदाहरण...
राजधानी के पंडरी स्थित मेन रोड पर देशी और विदेशी शराब दुकानें एक ही परिसर में संचालित हो रही हैं। इन दुकानों से सटे एक चखना सेंटर में खुलेआम शराब पीते लोग आसानी से देखे जा सकते हैं। शाम ढलते ही यहां का माहौल और भी खराब हो जाता है— गाली-गलौच, शराबियों के बीच झगड़े और मारपीट आम बात हो गई है। इससे न केवल स्थानीय रहवासी परेशान हैं, बल्कि बच्चों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार यहां संचालित आरव डेली नीड्स, जिसे हेमंत सिन्हा नामक व्यक्ति द्वारा चलाया जा रहा है, वर्षों से इसी तरह काम कर रही है। पूछताछ करने पर कथित तौर पर आबकारी विभाग से “तगड़ी सेटिंग” होने की बात कही जाती है, जिसके चलते कार्रवाई नहीं हो पा रही।
चखना दुकानों से बढ़ रही असामाजिक गतिविधियां...
शराब दुकान के सामने चखना दुकान होने के कारण शराबी वहीं बैठकर शराब पीते हैं। नतीजतन असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। मारपीट, शोर-शराबा और गाली-गलौच से पूरा इलाका अशांत हो जाता है।

सूत्रों की मानें तो अधिकांश अवैध चखना सेंटर राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों या आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों के कब्जे में हैं, जिनकी सरकारी अमले से गहरी सांठगांठ है।
ढाबों पर कार्रवाई, चखना दुकानों पर चुप्पी...
अक्सर देखने में आता है कि पुलिस और आबकारी विभाग ढाबों पर तो सख्ती दिखाते हैं, लेकिन शराब दुकानों के सामने चल रही चखना दुकानों से दूरी बनाए रखते हैं। सूत्रों का दावा है कि छोटे-बड़े चखना सेंटरों से रोजाना और माहवार वसूली की जा रही है। यह वसूली न सिर्फ आबकारी बल्कि पुलिस तक पहुंचने की चर्चा है।
नियम सिर्फ कागजों तक सीमित नियमों के अनुसार शराब दुकान के 50 मीटर के दायरे में चखना दुकान, खाने-पीने की सामग्री या प्लास्टिक डिस्पोजल बेचना प्रतिबंधित है। बावजूद इसके राजधानी में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।
देशी और विदेशी शराब दुकानों को एक ही स्थान पर संचालित किए जाने के कारण पहले ही अहाता सिस्टम समाप्त किया जा चुका है, लेकिन अवैध चखना दुकानों ने स्थिति को और बदतर बना दिया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन अवैध चखना सेंटरों पर कार्रवाई करेगा, या फिर नियमों की धज्जियां यूं ही उड़ती रहेंगी और आम जनता परेशान होती रहेगी?



