हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: फैमिली कोर्ट में साक्ष्य के रूप में स्वीकार होगी सीसीटीवी फुटेज की सीडी

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि फैमिली कोर्ट में किसी विवाद के निपटारे के लिए सीसीटीवी फुटेज, सीडी या अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने महासमुंद फैमिली कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें साक्ष्य के अभाव में तलाक की याचिका खारिज कर दी गई थी।
मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच में हुई। कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 14 और 20 के तहत अदालत को यह विशेष अधिकार है कि वह विवाद के समाधान के लिए किसी भी दस्तावेज को रिकॉर्ड पर ले सके। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के प्रमाणपत्र की तकनीकी कमी के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को खारिज नहीं किया जा सकता।
पूरा मामला रायगढ़ और महासमुंद से जुड़ा है। पति ने अपनी पत्नी पर क्रूरता और अन्य पुरुषों के साथ अश्लील वीडियो कॉल करने का आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी दी थी। सबूत के तौर पर उसने बेडरूम में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज वाली सीडी पेश की थी। दूसरी ओर, पत्नी ने पति पर उत्पीड़न और निजता के हनन का आरोप लगाया था। महासमुंद फैमिली कोर्ट ने सीडी के साथ जरूरी प्रमाणपत्र न होने की बात कहते हुए पति की याचिका खारिज कर दी थी।
अब हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद फैमिली कोर्ट मामले की दोबारा सुनवाई करेगा और सीसीटीवी फुटेज को साक्ष्य के रूप में शामिल किया जाएगा। इस फैसले को पारिवारिक विवादों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की स्वीकार्यता के नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है।



