कुम्हार की आजीविका पर रोक के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, कलेक्टर दुर्ग समेत अधिकारियों को नोटिस

बिलासपुर। आजीविका पर रोक लगाने के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाटन के नायब तहसीलदार के आदेश पर स्थगन दे दिया है। इसके साथ ही कलेक्टर दुर्ग सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
मामले में ग्राम कौही, तहसील पाटन, जिला दुर्ग निवासी कुमोद प्रजापति ने 26 फरवरी 2026 को नायब तहसीलदार द्वारा जारी आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता परंपरागत रूप से कुम्हार का काम करते हुए मिट्टी के बर्तन, सुराही और मटका बनाने का कार्य करते हैं, जिसे उनके परिवार द्वारा पीढ़ियों से किया जा रहा है।
याचिका में बताया गया कि गांव के उपसरपंच हेमलाल सोनकर और पूर्व माध्यमिक शाला कौही के हेडमास्टर मोहन लाल देवांगन की शिकायत के आधार पर नायब तहसीलदार ने बिना नोटिस दिए और बिना सुनवाई का अवसर प्रदान किए उनके काम पर रोक लगा दी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने इसे विधि विरुद्ध बताते हुए न्यायालय में चुनौती दी।
अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि वर्ष 2015 में माटीकला बोर्ड की अनुशंसा पर कुम्हारों को पारंपरिक रूप से मिट्टी के बर्तन बनाने के कार्य में 10 लाख रुपये तक की रॉयल्टी से छूट प्रदान की गई है। साथ ही सार्वजनिक स्थानों से 50 मीटर की दूरी बनाए रखते हुए निर्माण की अनुमति भी दी गई है।
इसके अलावा, वर्ष 2006 में अवर सचिव द्वारा सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी कर ग्राम पंचायत क्षेत्रों में कुम्हारों के लिए 5 एकड़ भूमि आरक्षित करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसका पालन अब तक नहीं किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने खनिज विभाग के अधिकारियों और नायब तहसीलदार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। न्यायालय ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई तक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नायब तहसीलदार के आदेश पर रोक लगाते हुए याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की है।



