छत्तीसगढ़ विधानसभा: कृषि और जनजाति विकास विभाग के लिए 50 हजार करोड़ से अधिक की अनुदान मांगें पारित

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में कृषि एवं अनुसूचित जनजाति विकास मंत्री रामविचार नेताम के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 50 हजार 537 करोड़ 98 लाख रुपये की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दी गईं। सदन में चर्चा का उत्तर देते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प प्रदेश के सर्वांगीण विकास और किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करना है।
अनुदान मांगों में कृषि विभाग के लिए 7075 करोड़, पशुपालन के लिए 656 करोड़ और मछली पालन विभाग के लिए 110 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए 39,568 करोड़ रुपये की बड़ी राशि आवंटित की गई है।
कृषि और किसान कल्याण
मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। उन्होंने कहा कि खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के उद्देश्य से दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार किसानों को 10 हजार रुपये की आदान राशि दे रही है, जिससे खेती का रकबा बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना के तहत किसानों को कम पानी में अधिक फसल लेने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
मछली पालन और पशुपालन
छत्तीसगढ़ ने मत्स्य बीज उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है और अब राज्य राष्ट्रीय स्तर पर छठे से पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। धमधा के राजपुर में मत्स्य कॉलेज के लिए 3 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही, पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए एनडीडीबी के साथ एमओयू किया गया है।
बस्तर और जनजातीय विकास
बस्तर पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद अब बस्तर विकास की नई उड़ान के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि नवा रायपुर में स्थापित जनजातीय संग्रहालय अब देश-विदेश के विशेषज्ञों के अध्ययन का केंद्र बन गया है। जनजातीय बच्चों की शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए बीजापुर में 500 सीटर आवासीय प्रयास विद्यालय की स्थापना की जाएगी। साथ ही, पिछले दो वर्षों में 167 आश्रम-छात्रावास भवनों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के माध्यम से सरकार प्रदेश के सुदूर वनांचलों में जनजातीय वर्गों के कायाकल्प के लिए प्रतिबद्ध है।



