परीक्षा पे चर्चा: प्रधानमंत्री ने छात्रों को दिए तनाव मुक्ति के मंत्र, संतुलित जीवन और स्टार्टअप के लिए किया प्रोत्साहित

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा के नौवें संस्करण के दूसरे एपिसोड के दौरान छात्रों से संवाद किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव और चिंता से निपटने के प्रभावी तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। गुवाहाटी के छात्रों के साथ बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री ने अपने व्यक्तिगत जीवन के अनुभव साझा किए और विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित किया।
अपनी जीवनशैली और खान-पान से जुड़े एक सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी डाइट का कभी कोई निश्चित सिस्टम नहीं रहा। उन्होंने बताया कि निरंतर यात्राओं के कारण जो उपलब्ध होता था, वे वही ग्रहण कर लेते थे। कई बार उन्हें स्वयं भोजन बनाना पड़ता था और वे अक्सर खिचड़ी बनाकर अपना काम चलाते थे। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए उन्होंने छात्रों को गहरी सांस लेने और सूर्योदय देखने जैसी आदतों को जीवन में शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शरीर को प्राथमिकता देना और उसे ताजगी प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है।
प्रधानमंत्री ने पढ़ाई और जुनून के बीच संतुलन बनाने पर जोर देते हुए कहा कि छात्रों को अकादमिक और रचनात्मक गतिविधियों को एक-दूसरे का विरोधी नहीं समझना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों का अपना महत्व है और रचनात्मक शौक छात्रों को पढ़ाई के दबाव से राहत दिलाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
स्वदेशी को बढ़ावा देने के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने वोकल फॉर लोकल और वेड इन इंडिया अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विदेशों के बजाय देश के भीतर विवाह समारोह आयोजित करने और भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देने से घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। प्रधानमंत्री के अनुसार, नागरिकों का हर छोटा कदम वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने छात्रों को उद्यमिता की ओर प्रेरित करते हुए छोटे स्टार्टअप से शुरुआत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बड़े विचार अक्सर छोटी शुरुआत से ही जन्म लेते हैं। प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने और उद्योगों की कार्यप्रणाली समझने के लिए पेशेवरों से संपर्क करने का सुझाव भी दिया।



