बंगाल में सत्ता का अंत, कैबिनेट भंग होते ही ममता बनर्जी का कार्यकाल खत्म

नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है। विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होते ही राज्यपाल ने पूरी कैबिनेट को भंग कर दिया, जिसके साथ ही ममता बनर्जी का मुख्यमंत्री पद स्वतः समाप्त हो गया। यह फैसला संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया, जिससे राज्य में 15 साल से चल रहा तृणमूल कांग्रेस का शासन अचानक खत्म हो गया।
कोलकाता गजट में जारी अधिसूचना के अनुसार राज्यपाल आर.एन. रवि ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 (2)(b) के तहत विधानसभा को भंग करने का निर्णय लिया। यह आदेश 7 मई 2026 से प्रभावी हो गया है। अधिसूचना पर राज्य के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं। इस फैसले के साथ ही राज्य में न तो कैबिनेट अस्तित्व में रही और न ही मुख्यमंत्री का पद।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी इस्तीफा देने को तैयार नहीं थीं और चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठा रही थीं। हालांकि संवैधानिक प्रावधानों के चलते यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं बनी रह सकी और विधानसभा भंग होते ही उनका पद स्वतः समाप्त हो गया।
अब राज्य में नई सरकार के गठन तक प्रशासनिक जिम्मेदारी राजभवन के अधीन रहेगी। पूर्व केंद्रीय सचिव जवाहर सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह राष्ट्रपति शासन नहीं है, बल्कि एक अंतरिम व्यवस्था है। इस दौरान राज्यपाल ही शासन की कमान संभालेंगे और सभी प्रशासनिक निर्णय उनकी निगरानी में होंगे।
इसी बीच सियासी गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार रात कोलकाता पहुंचेंगे। उनका दौरा नई सरकार के गठन और 9 मई को प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस दौरान वे राजनीतिक समीकरणों और प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा करेंगे।



