लोकसभा में हंगामे से धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा अधूरी, प्रधानमंत्री का जवाब नहीं हो सका

नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को भारी हंगामे के कारण राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा पूरी नहीं हो सकी। हालात ऐसे रहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन को संबोधित नहीं कर पाए और कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा।
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सदन में जो स्थिति बनी, वह कांग्रेस की हताशा को दर्शाती है। उनका आरोप था कि कांग्रेस प्रधानमंत्री को बोलने नहीं देना चाहती और देश इस व्यवहार को देख रहा है।
हंगामे की शुरुआत सुबह से ही हो गई थी। विपक्षी सांसद चीन के साथ वर्ष 2020 के सीमा गतिरोध और राहुल गांधी को पूर्व थलसेना प्रमुख एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा से उद्धरण देने की अनुमति न मिलने के मुद्दे पर विरोध कर रहे थे। इस दौरान बार बार शोर शराबा होने से सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
भाजपा सांसदों का कहना है कि राहुल गांधी ने जिस पुस्तक का हवाला दिया, वह अभी प्रकाशित नहीं हुई है, जबकि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने प्रकाशित पुस्तक का संदर्भ दिया था।
शाम करीब पांच बजे जब सदन दोबारा शुरू हुआ और प्रधानमंत्री के बोलने की संभावना बनी, तब विपक्ष की कुछ महिला सांसदों ने सत्तापक्ष की सीटों के सामने प्रदर्शन शुरू कर दिया। इनमें वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि शामिल थीं। उन्होंने एक बैनर के साथ विरोध किया और प्रधानमंत्री की सीट सहित कुछ अन्य सीटों को घेर लिया। यह विरोध एक दिन पहले निलंबित किए गए आठ विपक्षी सांसदों के समर्थन में किया गया था। उस समय पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने स्थिति को देखते हुए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। बाद में मंत्रियों के आग्रह पर महिला सांसद अपनी सीटों पर लौट गईं।
इस बीच विपक्ष ने सरकार पर संसदीय परंपराओं का उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल द्वारा भारत अमेरिका व्यापार समझौते की जानकारी पहले संसद के बाहर प्रेसवार्ता में दिए जाने को लेकर असंतोष जताया गया। राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता प्रतिपक्ष प्रमोद तिवारी ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि नीतिगत विषयों की जानकारी सबसे पहले संसद में दी जानी चाहिए।
हालांकि सभापति सीपी राधाकृष्णन ने व्यवस्था के प्रश्न को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मंत्री बुधवार को स्वयं सदन में इस विषय पर वक्तव्य देना चाहते थे और सदन को पूरी जानकारी दी जाएगी।



