सीएसआर फंड दिलाने के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी, अंतरराज्यीय गैंग के 5 आरोपी गिरफ्तार

रायगढ़। सीएसआर मद से एनजीओ को फंड दिलाने के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गैंग के पांच सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी टेलीग्राम के जरिए कॉरपोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराकर ठगी की रकम का 5 से 15 प्रतिशत तक कमीशन लेते थे। आरोपियों के खिलाफ देशभर में 44 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हैं। एनजीओ कार्यकर्ता के खाते का उपयोग कर आरोपियों ने 2 करोड़ 17 लाख रुपए का लेनदेन किया।
मामला रायगढ़ जिले के इंदिरानगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता आयशा परवीन से जुड़ा है। उन्होंने 12 मार्च को साइबर थाना रायगढ़ में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता के अनुसार दिसंबर 2025 में उनके भांजे ने अभय यादव और विजय चंद्रा से मुलाकात कराई थी। विजय चंद्रा ने एक कंपनी द्वारा सीएसआर फंड देने की बात कहकर उनके संस्थान के दस्तावेज ले लिए।
कुछ समय बाद विजय चंद्रा ने अजय साहू और सचिन चौहान से संपर्क कराया। आरोपियों के कहने पर पीड़िता ने अपने संस्थान के नाम से एक्सिस बैंक में खाता खुलवाया। इसके बाद आरोपियों ने ऑनलाइन लेनदेन के लिए एमपिन और अन्य लॉगिन प्रक्रिया पूरी कर ली।
आरोपियों ने पीड़िता और उनके पति को अनुदान और नौकरी के नाम पर गुवाहाटी बुलाया। वहां होटल में ठहराने के बाद खुद को कंपनी कर्मचारी बताने वाले लोगों ने मोबाइल में एपीके फाइल डाउनलोड कराई और बैंक खाते को अपने नियंत्रण में ले लिया। एक सप्ताह तक विभिन्न लेनदेन कराए गए और 12 जनवरी 2026 को उन्हें वापस भेज दिया गया।
रायगढ़ लौटने पर बैंक से संदिग्ध लेनदेन की सूचना मिली। जांच में पता चला कि 29 दिसंबर 2025 से ही खाते में संदिग्ध ट्रांजेक्शन हो रहे थे। बाद में विभिन्न राज्यों से मेल के माध्यम से साइबर ठगी से संबंधित रकम जमा होने की जानकारी मिली। संपर्क करने पर मुख्य आरोपी ने पहले टालमटोल किया और बाद में गायब हो गया।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी टेलीग्राम के जरिए साइबर ठगी गिरोह से जुड़े थे। विजय चंद्रा ने गुवाहाटी स्थित गैंग को कॉरपोरेट खाते की जानकारी उपलब्ध कराई। इसके बाद गैंग ने खाते का उपयोग कर बड़े पैमाने पर ठगी की रकम का लेनदेन किया।
जांच में यह भी सामने आया कि अभय यादव पहले एक स्थानीय बैंक में कार्यरत था और विजय चंद्रा का परिचित था। गैंग में शामिल अन्य सदस्यों के साथ मिलकर आरोपियों ने टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से देशभर के साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराए। इन खातों के जरिए ठगी की रकम ट्रांजेक्शन कराई जाती थी, जिसके बदले आरोपियों को 5 से 15 प्रतिशत तक कमीशन मिलता था।



