दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 17 साल बाद DTC में ड्राइवर पद पर नियुक्ति के आदेश

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में 17 साल से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे एक व्यक्ति को दिल्ली परिवहन निगम में ड्राइवर पद पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने संबंधित विभाग को दो महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए हैं।
यह फैसला जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने सुनाया। मामला आरक्षण नीति से जुड़ा था, जिसमें याचिकाकर्ता को सभी योग्यताएं पूरी करने के बावजूद नौकरी नहीं दी गई थी।
जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता ने वर्ष 2009 में दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से डीटीसी में ड्राइवर पद के लिए आवेदन किया था। उस समय उसकी उम्र 29 वर्ष थी। उसने लिखित परीक्षा और कौशल परीक्षण दोनों में सफलता हासिल की, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान उसकी उम्मीदवारी खारिज कर दी गई।
विभाग का कहना था कि याचिकाकर्ता ने अनुसूचित जाति वर्ग के तहत आवेदन किया था, जबकि उसकी जाति दिल्ली में इस श्रेणी में शामिल नहीं है। हालांकि, वह उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग में आता है।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है, जहां देश के विभिन्न राज्यों के लोग रोजगार के लिए आते हैं। ऐसे में दूसरे राज्य का आरक्षण दिल्ली में लागू करना कानून सम्मत है।
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2018 के एक फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरे राज्यों के अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों को आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है।
अदालत ने यह भी कहा कि नियुक्ति से पहले संबंधित विभाग उम्मीदवार की वर्तमान योग्यता का मूल्यांकन कर सकता है, लेकिन केवल आरक्षण के आधार पर उसकी उम्मीदवारी खारिज करना उचित नहीं है।
इस फैसले के साथ ही याचिकाकर्ता को 46 वर्ष की उम्र में नौकरी मिलने का रास्ता साफ हो गया है।



