CSMCL मैनपावर घोटाला: अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया के खिलाफ पूरक चालान पेश, 182.98 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान का मामला

रायपुर। CSMCL के मैनपावर भुगतान घोटाले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) ने तत्कालीन प्रबंध संचालक (एमडी) अरुणपति त्रिपाठी और मैनपावर एजेंसी संचालक बच्छ राज लोहिया उर्फ बी.आर. लोहिया के खिलाफ पूरक चालान पेश किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, शासकीय शराब दुकानों के कर्मचारियों के नाम पर पांच मैनपावर एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के कार्य के भुगतान के नाम पर कुल 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। आरोप है कि कर्मचारियों को यह राशि दिए बिना फर्जी या वास्तविक भुगतान से अधिक के देयक प्रस्तुत किए गए और रकम का एक हिस्सा कमीशन के रूप में लिया गया।
EOW/ACB के अनुसार, अपराध क्रमांक 44/2024 की विवेचना के दौरान दोनों आरोपियों की संलिप्तता से जुड़े साक्ष्य मिलने के बाद यह पूरक चालान विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में प्रस्तुत किया गया। इस मामले में नवीन प्रताप सिंह तोमर, अनवर ढेबर, मैनपावर एजेंसियों के संचालकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों समेत 12 आरोपियों के खिलाफ 18 मई 2026 को पहले ही चालान पेश किया जा चुका है।
जांच में पाया गया कि सीएसएमसीएल की शासकीय शराब दुकानों में कर्मचारी उपलब्ध कराने का काम विभिन्न मैनपावर एजेंसियों को दिया गया था। वर्ष 2019 की निविदा में नियमित वेतन के अलावा ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के कार्य के भुगतान का प्रावधान किया गया। एजेंसियों को पहले यह रकम कर्मचारियों को देनी थी और उसके बाद सीएसएमसीएल से उसका भुगतान प्राप्त करना था। इसके विपरीत एजेंसियों ने कर्मचारियों को रकम दिए बिना अथवा वास्तविक भुगतान से अधिक रकम दिखाकर देयक प्रस्तुत किए और सीएसएमसीएल से भुगतान प्राप्त किया। दुकानों के कर्मचारियों ने अपने कथनों में बताया कि उन्हें सामान्य मासिक वेतन मिलता था, लेकिन उनके नाम पर ली गई उक्त अतिरिक्त रकम नहीं दी गई।
पांच एजेंसियों को 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान
जांच में वर्ष 2019 से 2023 के बीच पांच मैनपावर एजेंसियों सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड, प्राइमवन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड, ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड, अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड और ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड को ओवरटाइम, बोनस, चार अतिरिक्त दिनों के कार्य और इन मदों पर सेवा शुल्क के रूप में कुल 1,82,98,48,675 रुपये का अतिरिक्त भुगतान होना पाया गया। इस रकम का एक हिस्सा अधिकारियों और सिंडिकेट को कमीशन के रूप में दिया जाता था तथा शेष रकम कंपनियों अपने पास रखती थीं। इस प्रकार शासन को लगभग 182.98 करोड़ रुपये की हानि पहुँचाई गई।
अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में 152.40 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान
अरुणपति त्रिपाठी 9 मई 2019 से 13 मई 2023 तक सीएसएमसीएल के प्रबंध संचालक रहे। उनके पास निगम के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों, निविदा तथा मैनपावर एजेंसियों के देयकों को अनुमोदित करने के अधिकार थे। विवेचना में पाया गया कि अनवर ढेबर के कहने पर उन्होंने निविदा की शर्तों में परिवर्तन कराया और कर्मचारियों के नाम पर अतिरिक्त भुगतान कराकर उसका हिस्सा कमीशन के रूप में लेने की व्यवस्था लागू कराई। उनके कार्यकाल में पाँचों एजेंसियों को कुल 1,52,39,77,666 रुपये, अर्थात लगभग 152.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसमें ओवरटाइम के लगभग 82.66 करोड़ रुपये, बोनस के 12.21 करोड़ रुपये, चार अतिरिक्त दिनों के कार्य के 45.02 करोड़ रुपये और सेवा शुल्क के 12.51 करोड़ रुपये शामिल हैं।
एजेंसियों से नगद कमीशन एकत्र कर अरुणपति त्रिपाठी तक पहुँचाने का काम सिद्धार्थ सिंघानिया करता था। उसने अपने कथन में बताया कि सभी एजेंसियों से मिलाकर लगभग 70 से 80 लाख रुपये प्रतिमाह कमीशन आता था। अक्टूबर 2019 से मार्च 2023 के बीच अकेले सुमीत फैसिलिटीज की ओर से लगभग 15.65 करोड़ रुपये दिए गए थे। विवेचना में अरुणपति त्रिपाठी द्वारा अपने कार्यकाल में मैनपावर एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपये नकद कमीशन प्राप्त कर अनवर ढेबर तक पहुँचाने के साक्ष्य मिले हैं। उनके कार्यकाल के बाद भी नवीन प्रताप सिंह तोमर के माध्यम से कमीशन वसूली जारी रही। इस दौरान सेवा शुल्क और ओवरटाइम की राशि पर कमीशन की दर बढ़ाकर एक-तिहाई किए जाने का विवरण भी प्राप्त हुआ है। अरुणपति त्रिपाठी के हिस्से का अवैध रकम में से लगभग 3 करोड़ रुपये ईडी ने जब्त किये हैं।
ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज को 48 करोड़ से अधिक का भुगतान
बी.आर. लोहिया ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड के संस्थापक थे। अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड भी इसी समूह की कंपनी थी। दोनों कंपनियों के प्रमुख निर्णय बी. आर. लोहिया द्वारा लिए जाते थे। उन्होंने कंपनी के सी.ए. नीरज चौधरी को कर्मचारियों के ओवरटाइम और चार अतिरिक्त दिनों के कार्य के बिल जारी करने के निर्देश दिए थे। इन बिलों के आधार पर सीएसएमसीएल से रकम प्राप्त की गई, लेकिन कर्मचारियों को उसका भुगतान नहीं किया गया। कंपनी की ओर से अधिकारियों को नकद कमीशन भी बी.आर. लोहिया के निर्देश पर दिया जाता था। देयक तैयार कराने से लेकर कमीशन की रकम की व्यवस्था और उसके भुगतान में उनकी भूमिका पाई गई है।
ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड को 33,45,05,110 रुपये और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड को 14,63,48,143 रुपये, कुल 48,08,53,253 रुपये का अतिरिक्त भुगतान प्राप्त हुआ। इसमें से 38,31,76,541 रुपये अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में दिए गए थे। ईगल हंटर से संबंधित नकद कमीशन के वित्तीय विवरण में 13,57,92,000 रुपये दर्ज हैं। उक्त रकम में अलर्ट कमांडोज की ओर से दिया गया कमीशन भी शामिल होना पाया गया है।
28.80 लाख रुपये की रकम ईडी की कार्रवाई में हुई थी बरामद
29 नवंबर 2023 को ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज के अक्टूबर 2023 के लंबित बिल पारित कराने के बदले तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर को लगभग 28.80 लाख रुपये दिए जाने थे। इसके लिए बी.आर. लोहिया और अजय लोहिया के निर्देश पर दिल्ली से 29.40 लाख रुपये का चेक रायपुर भेजा गया। बैंक से रकम निकालने के बाद 60,000 रुपये कार्यालयीन खर्च के लिए रखे गए और शेष 28.80 लाख रुपये कमीशन देने के लिए अलग किए गए। कंपनी के कर्मचारी रकम पहुंचाने जा रहे थे, तभी प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई में उक्त रकम बरामद हुई। जांच में इस रकम का संबंध पहले से चल रही मैनपावर कमीशन वसूली से पाया गया।
विवेचना में आंगड़िया नेटवर्क के माध्यम से नगद रकम बाहर भेजने संबंधी कथन भी प्राप्त हुए हैं। महमूद अहमद खान ने बताया कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच उसने पी. विजय कंपनी तक लगभग 60 से 70 करोड़ रुपये नगद पहुंचाए थे। उसे उक्त रकम अरुणपति त्रिपाठी की बताई गई थी। पी. विजय कुमार एण्ड कंपनी के तत्कालीन पार्टनर निमेष चन्द्रकान्त पटेल ने अपने कथन में उक्त रकम मुंबई में श्रीजी इंटरप्राइजेज को देने और आगे हैदराबाद भेजे जाने की बात बताई है। इन गवाहों के कथन भी चालान में शामिल किए गए हैं।
अरुणपति त्रिपाठी न्यायिक अभिरक्षा में, लोहिया के खिलाफ फरारी में चालान
चालान में शराब दुकानों के कर्मचारियों और अन्य साक्षियों के कथन, सीएसएमसीएल के भुगतान अभिलेख, एजेंसियों के देयक, कंपनी अभिलेख, बैंक दस्तावेज और नगद कमीशन के वित्तीय विवरण प्रस्तुत किए गए हैं। अरुणपति त्रिपाठी न्यायिक अभिरक्षा में हैं। बी.आर. लोहिया बार-बार नोटिस दिए जाने के बाद भी पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए। उनके संबंध में फरारी पंचनामा तैयार कर फरारी में चालान पेश किया गया है। दोनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 (बी), 8 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 471 और 120बी के अंतर्गत पूरक चालान प्रस्तुत किया गया है।



