आबकारी विभाग के टेंडर पर उठे सवाल: जोन-1 में पुरानी प्रणाली की वापसी के आरोप, ओवर रेटिंग और अवैध उगाही की चर्चा…

2026-27 के लिए तीन साल का टेंडर, निजी कंपनी को जिम्मेदारी; चयन प्रक्रिया और कार्यप्रणाली पर उठे सवाल...
रायपुर। छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए जारी किए गए टेंडर को लेकर विवाद खड़ा होता नजर आ रहा है। यह टेंडर तीन वर्षों की अवधि के लिए जारी किया गया है, जिसमें जोन-1 की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी गई है।
सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि इस जोन में पूर्व में प्रचलित एक पुरानी प्रणाली को फिर से लागू किए जाने की कोशिश हो रही है। साथ ही कुछ व्यक्तियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रायपुर क्षेत्र में कार्यरत कुछ लोगों पर पहले भी ओवर रेटिंग और डाइल्यूशन (मिलावट) जैसे आरोप लगते रहे हैं। अब उन्हीं नामों की दोबारा सक्रियता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि टीम गठन और नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं बरती गई है, और कथित तौर पर आर्थिक लेन-देन के आधार पर कुछ लोगों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
इस पूरे मामले में आबकारी विभाग की भूमिका और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह राजस्व और पारदर्शिता दोनों के लिए गंभीर मुद्दा साबित हो सकता है।
फिलहाल, इस मामले में संबंधित विभाग या कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



