रसोई में बदल रहे इंतजाम: गैस सिलेंडर की जगह ले रहे इंडक्शन चूल्हे, दो दिनों में बिक्री 30 गुना बढ़ी

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच देश में इंडक्शन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ गई है। बढ़ती मांग के चलते कई शहरों में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन चूल्हे आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं।
ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और बिग बास्केट जैसे प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन चूल्हों की उपलब्धता कम हो गई है। आमतौर पर इंडक्शन चूल्हे को एलपीजी सिलेंडर के विकल्प के रूप में देखा जाता है। एलपीजी की संभावित कमी की आशंका के चलते लोग तेजी से इसकी ओर रुख कर रहे हैं।
ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी इसकी मांग में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। अमेजन इंडिया के प्रवक्ता के अनुसार पिछले दो दिनों में इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में 30 गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है। प्रवक्ता ने बताया कि इसी अवधि में राइस कुकर और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर की मांग सामान्य से करीब चार गुना बढ़ गई है, जबकि एयर फ्रायर और मल्टी यूज केतली की बिक्री लगभग दोगुनी हो गई है।
फ्लिपकार्ट ने भी मांग में तेज वृद्धि की पुष्टि की है। कंपनी के अनुसार पिछले कुछ हफ्तों की तुलना में पिछले चार से पांच दिनों में इंडक्शन चूल्हों की बिक्री लगभग चार गुना बढ़ गई है। दिल्ली, कोलकाता और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में मांग में विशेष तेजी देखी गई है, जहां उपभोक्ता भविष्य में कीमतों में संभावित उतार चढ़ाव और आपूर्ति में कमी की आशंका को देखते हुए वैकल्पिक साधनों की तलाश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार मांग में यह उछाल घरों और छोटे कारोबारों में रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण एलपीजी और अन्य ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
इस बीच तेल विपणन कंपनियों ने एलपीजी वितरकों से अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक संस्थानों को आपूर्ति में प्राथमिकता देने का अनुरोध किया है। वहीं सरकार ने घरेलू एलपीजी उत्पादन में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि की है और पश्चिम एशिया की स्थिति को देखते हुए उत्पादन का पूरा हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं की आपूर्ति के लिए निर्देशित किया जा रहा है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार सरकार ने 8 मार्च को आदेश जारी कर रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए हैं, ताकि देश में रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो।



