बस्तर पंडुम 2026 से सहेजी जाएगी जनजातीय संस्कृति, नारायणपुर से 156 प्रतिभागी चयनित

रायपुर, 29 जनवरी 2026। जनजातीय बहुल बस्तर संभाग की समृद्ध लोककला, सांस्कृतिक परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण व संवर्धन के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन जनजातीय कलाकारों को प्रोत्साहन और सम्मान देने के साथ उनकी सांस्कृतिक पहचान को व्यापक मंच उपलब्ध कराने का प्रयास है।
बस्तर पंडुम के माध्यम से जनजातीय समाज की जीवनशैली से जुड़ी लोककला, शिल्प, तीज-त्योहार, खानपान, बोली-भाषा, रीति-रिवाज, वेशभूषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्य यंत्र, नृत्य, गीत-संगीत, नाट्य, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन औषधियों को एक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है। यह आयोजन परंपरागत ज्ञान को सहेजने के साथ नई पीढ़ी तक जीवंत रूप में पहुंचाने का माध्यम बन रहा है।
बस्तर पंडुम की अवधारणा जनजातीय समाज के पारंपरिक मेलों और उत्सवों से प्रेरित है, जहां कला, प्रकृति और सामूहिक जीवन का विशेष महत्व रहा है। राज्य शासन द्वारा इसे संगठित और प्रतिस्पर्धात्मक स्वरूप देकर कलाकारों को पहचान और सम्मान प्रदान किया जा रहा है। आज यह आयोजन जनजातीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है।
नारायणपुर जिले में आयोजित जिला स्तरीय बस्तर पंडुम प्रतियोगिता के लिए विभिन्न विधाओं में कुल 156 प्रतिभागियों और टीमों का चयन किया गया है। इनमें जनजातीय नृत्य की 42 टीमें, जनजातीय गीत की 20 टीमें, जनजातीय नाट्य के 27 प्रतिभागी, जनजातीय वेशभूषा के 5, जनजातीय शिल्प का 1, जनजातीय चित्रकला के 2, जनजातीय पेय के 18, जनजातीय व्यंजन के 15, जनजातीय वाद्य यंत्र के 14, जनजातीय साहित्य के 5 और जनजातीय औषधि के 4 प्रतिभागी शामिल हैं।
बस्तर पंडुम 2026 बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए जनजातीय प्रतिभाओं को सम्मान देने और उनकी पहचान को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में उभर रहा है।



