भागीरथपुरा में बोरिंग का पानी दूषित, 35 सैंपल फेल, 20 की मौत, 56 मरीज भर्ती

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित भागीरथपुरा क्षेत्र में बोरिंग के पानी में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए जाने की पुष्टि हुई है। यह बैक्टीरिया हैजा, टाइफॉइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। जांच में लिए गए 60 पानी के सैंपल में से 35 सैंपल फेल हो गए हैं। वार्ड के भाजपा पार्षद कमल वाघेला के बोरिंग का पानी भी दूषित पाया गया है।
दूषित पानी के कारण अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 9 मरीज अभी भी आईसीयू में भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस पूरे मामले में कुल 437 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार रात तक 381 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया है। फिलहाल 56 मरीजों का इलाज जारी है।
बुधवार को भागीरथपुरा चौकी के पास बनी पानी की टंकी का वॉल खोला गया। इस दौरान स्थिति और भी गंभीर सामने आई। दो दिन पहले जहां ड्रेनेज लाइन का पाइप डाला गया था, वहीं से पानी बहने लगा। कुछ ही देर में ड्रेनेज लाइन के लिए खोदे गए गड्ढे में पानी भर गया, जिससे सीवेज और पेयजल लाइन के मिलावट की आशंका और पुख्ता हो गई।
नर्मदा लाइन से आ रहे पानी के उपयोग को लेकर पहले ही क्षेत्र में मुनादी कराई जा चुकी है। लोगों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इस पानी का इस्तेमाल न करें। यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी ताकि नर्मदा लाइन से दूषित पानी पूरी तरह बाहर निकाला जा सके।
इलाके में दूषित पानी को लेकर दहशत का माहौल है। लोग पानी को छानकर और उबालकर पीने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार समझाइश दी जा रही है कि पीने के लिए पानी को उबालकर ही उपयोग करें।
भागीरथपुरा में लगातार हो रही मौतों के बाद लोगों ने बोरिंग का उपयोग बंद कर दिया है। अब रहवासी टैंकर और आरओ के पानी पर निर्भर हैं। बुधवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डायरिया की शिकायत लेकर 18 मरीज पहुंचे थे, जिनमें से 6 मरीजों को रेफर किया गया है।



