
अंबिकापुर। सरगुजा में सरकारी शराब दुकानों में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से कथित तौर पर लाखों रुपये की वसूली का मामला सामने आया है। आरोप है कि रायपुर से अंबिकापुर पहुंचे कुछ लोग प्लेसमेंट कर्मचारियों की भर्ती का झांसा देकर युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं। खास तौर पर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है।
जानकारी के मुताबिक, शासकीय शराब दुकानों में प्लेसमेंट कर्मचारियों की नियुक्ति का ठेका Teem HR कंपनी को मिलने के बाद कथित ठगी का यह नेटवर्क सक्रिय हुआ। आरोप है कि नौकरी की तलाश में आने वाले युवाओं को सुपरवाइजर और सेल्समैन के पद पर नियुक्ति का भरोसा दिलाया जाता है और इसके बदले मोटी रकम मांगी जाती है।
रायपुर से आया शख्स, अंबिकापुर में जमाया डेरा...
मामले में रायपुर निवासी दिलीप यादव उर्फ तनमय यादव का नाम सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि वह करीब एक महीने से अंबिकापुर में रहकर युवाओं से संपर्क कर रहा है। आरोप है कि वह खुद को कंपनी के अधिकारियों का करीबी बताकर नौकरी लगवाने का भरोसा देता है और इसके बदले पैसे की मांग करता है।

कई युवाओं द्वारा नौकरी की उम्मीद में अपनी जमा पूंजी तक लगाए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
कंपनी के फील्ड अफसर पर भी उठे सवाल...
इस पूरे मामले में Teem HR के फील्ड अफसर दुर्गेश सिन्हा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि दिलीप यादव और दुर्गेश सिन्हा की कथित मिलीभगत से नौकरी के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं।

मामला केवल नई भर्ती तक सीमित नहीं होने का भी आरोप है। वर्तमान में शराब दुकानों में काम कर रहे प्लेसमेंट कर्मचारियों ने भी कथित तौर पर दबाव बनाए जाने की शिकायत की है। आरोप है कि उनसे हर महीने एक निश्चित रकम की मांग की जाती है और रकम नहीं देने पर नौकरी से हटाने अथवा दूरस्थ क्षेत्र में भेजने की धमकी दी जाती है।
पहले भी ठगी के मामले में जेल जा चुका है आरोपी...
दिलीप यादव के खिलाफ पूर्व में भी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि रायपुर के खम्हारडीह थाना क्षेत्र में करीब 5 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे जेल भेजा गया था।

अब आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद उसने सरगुजा को अपना नया ठिकाना बनाया और यहां भी नौकरी के नाम पर युवाओं से पैसे लेने का सिलसिला शुरू कर दिया।
आबकारी विभाग से आधिकारिक पक्ष का इंतजार...
मामले को लेकर जिला आबकारी विभाग का आधिकारिक पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि सरगुजा जिले में नए जिला आबकारी अधिकारी की पदस्थापना हो चुकी है, हालांकि खबर लिखे जाने तक उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था।
अब बड़ा सवाल यह है कि अगर सरकारी शराब दुकानों में प्लेसमेंट कर्मचारियों की नियुक्ति के नाम पर वसूली का खेल चल रहा है, तो इसके पीछे कौन लोग हैं और बेरोजगार युवाओं से लिए गए पैसों का हिसाब क्या है? शिकायतों और आरोपों की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।



