छत्तीसगढ़ में नशे के खिलाफ सरकार का बड़ा फैसला, पांच नए जिलों में खुलेंगे नशामुक्ति केंद्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नशामुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। नवा रायपुर के मंत्रालय महानदी भवन में गुरुवार को शराब व्यसन मुक्ति अभियान की एक अहम समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार ने की। बैठक में राज्य के युवाओं को नशे की लत से बचाने और प्रभावित लोगों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए। सरकार ने तय किया है कि राज्य के पांच नए जिलों में बहुत जल्द सर्वसुविधायुक्त नशामुक्ति केंद्र खोले जाएंगे।

इन पांच जिलों के लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार जिन पांच जिलों में नए नशामुक्ति केंद्र (New Rehab Centers) खोले जाएंगे, उनमें मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सुकमा, बेमेतरा और कोरबा शामिल हैं। अब तक इन इलाकों के लोगों को इलाज और काउंसलिंग के लिए दूसरे बड़े शहरों में जाना पड़ता था। इसके साथ ही सरकार ने पहले से चल रहे 15 बिस्तरों वाले पुनर्वास केंद्रों की क्षमता को बढ़ाकर 50 बिस्तर करने का भी सुझाव दिया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों का एक साथ इलाज किया जा सके।
तीसरी आंख की निगरानी में सुधरेंगे नशा पीड़ित लोग
नशामुक्ति केंद्रों की व्यवस्था को और बेहतर तथा पारदर्शी बनाने के लिए सरकार अब तकनीकी तौर पर कड़े कदम उठाने जा रही है। इन केंद्रों के अंदर क्या चल रहा है, इस पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए जाएंगे। इसके अलावा वहां काम करने वाले स्टाफ की समय पर उपस्थिति दर्ज करने के लिए बायोमैट्रिक सिस्टम यानी अंगूठे के निशान से हाजिरी लगाने वाली मशीन लगाई जाएगी। इस व्यवस्था से केंद्रों के कामकाज में लापरवाही रुकेगी और पारदर्शिता बनी रहेगी।
गांव-गांव तक पहुंचेगी भारत माता वाहिनी योजना
बैठक में ग्रामीण इलाकों पर विशेष ध्यान दिया गया। सरकार अपनी लोकप्रिय भारत माता वाहिनी योजना का विस्तार अब हर उस नई ग्राम पंचायत तक करने जा रही है, जिसकी आबादी एक हजार से ज्यादा है। इस योजना के तहत गांवों में स्थानीय महिलाओं और नागरिकों की टोलियां बनाई जाती हैं, जो लोगों को शराब और अन्य नशों से दूर रहने के लिए समझाती हैं। प्रमुख सचिव ने कहा कि समाज को नशामुक्त बनाने के लिए केवल सरकारी प्रयास काफी नहीं हैं, बल्कि इसमें आम जनता और सामाजिक संगठनों का साथ आना भी बेहद जरूरी है।



