भिलाई स्टील प्लांट स्क्रैप चोरी मामले में बड़ी कामयाबी, मुख्य आरोपी संजय सिंह यूपी के देवरिया से गिरफ्तार

दुर्ग
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। भिलाई स्टील प्लांट यानी बीएसपी से करोड़ों रुपये के लोहे की चोरी के मामले में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। इस पूरे गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड और लंबे समय से फरार चल रहा आरोपी संजय सिंह आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। दुर्ग पुलिस की एक स्पेशल टीम ने उत्तर प्रदेश के देवरिया में घेराबंदी करके उसे गिरफ्तार किया है। आरोपी संजय सिंह को मंगलवार को दुर्ग लाया गया। इसके साथ ही पुलिस ने इस खेल में शामिल एक और आरोपी पिंटू उर्फ उपेंद्र ओझा को भी दबोच लिया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करके सात दिनों की पुलिस रिमांड पर ले लिया है और अब उनसे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है।
फ्लाई ऐश डस्ट की आड़ में चल रहा था लोहे की चोरी का बड़ा खेल
इस पूरे मामले का भंडाफोड़ पिछले महीने 26 मई को हुआ था। पुलिस ने हथखोज भिलाई के इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित एके ट्रेडर्स के प्लॉट पर छापा मारा था। जांच में पता चला कि बीएसपी से फ्लाई ऐश डस्ट यानी कोयले की राख उठाने के नाम पर एक टेंडर (ठेका) लिया गया था। इस ठेके में संजय सिंह पार्टनर था। संजय सिंह ने राख की आड़ में बीएसपी के कीमती लोहे को पार करने का एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया था। इस चोरी का पता चलते ही बीएसपी के महाप्रबंधक ने संजय सिंह और उसके साथियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी।
छापेमारी में मिला था 90 लाख का लोहा, 8 आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल
जब पुलिस ने एके ट्रेडर्स के ठिकाने पर रेड मारी थी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए थे। ट्रकों और हाइवा गाड़ियों में नीचे बीएसपी की कीमती लोहे की प्लेटें और बीम भरे हुए थे और ऊपर से उन्हें छिपाने के लिए राख डाली गई थी। पुलिस ने मौके से करीब 250 टन चोरी का लोहा बरामद किया था, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 90 लाख रुपये थी। इसके अलावा चोरी में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों और क्रेन जैसी भारी मशीनों को मिलाकर पुलिस ने कुल 3 करोड़ 22 लाख रुपये की भारी-भरकम संपत्ति जब्त की थी।
दुर्ग के एडिशनल एसपी सुखनंदन राठौर ने बताया कि इस वीआईपी केस में पुलिस पहले ही आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। मुख्य आरोपी संजय सिंह पुलिस से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था, लेकिन साइबर सेल और लोकल पुलिस की मदद से उसे यूपी से दबोच लिया गया। पुलिस का कहना है कि यह पूरा गैंग बीएसपी के सरकारी लोहे को अवैध तरीके से छिपाकर बेचने और मोटा मुनाफा कमाने के लिए काम कर रहा था। इस मामले में जुड़े कुछ और लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।



