Chhattisgarh

इज़राइल-ईरान युद्ध के बीच छत्तीसगढ़ में खाद संकट का खतरा, साय सरकार ने चक्रव्यूह तैयार कर बचाई किसानों की फसल

रायपुर। पश्चिमी एशिया में गहराते युद्ध के संकट ने दुनियाभर की सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारत में आयातित उर्वरकों की आपूर्ति बाधित होने की प्रबल आशंका पैदा हो गई है। इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने किसानों की ढाल बनते हुए राज्य में खाद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री के विशेष प्रयासों के फलस्वरूप केंद्र सरकार ने आगामी खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ को 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का विशाल लक्ष्य आवंटित कर दिया है।

युद्ध के साये में बड़ी रणनीति

अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता को देखते हुए राज्य सरकार ने उर्वरक प्रबंधन को लेकर अपनी रणनीति बदल दी है। मंत्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट किया है कि पश्चिमी एशियाई संकट से होने वाली संभावित कमी को भांपते हुए विभाग अब वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग पर आक्रामक तरीके से काम कर रहा है। किसानों को केवल पारंपरिक खादों पर निर्भर रहने के बजाय एनपीके, नैनो यूरिया, हरी खाद और जैविक खाद अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि वैश्विक संकट का असर छत्तीसगढ़ के खेतों और किसान की आमदनी पर किसी भी सूरत में न पड़े।

स्टॉक की स्थिति और सख्त निगरानी

वर्तमान में राज्य के गोदामों और सहकारी समितियों में 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद का सुरक्षित भंडार मौजूद है। इसमें यूरिया, डीएपी और एनपीके की बड़ी खेप शामिल है जो शुरुआती जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार ने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए हैं कि आपूर्ति में पारदर्शिता लाने के लिए नई ई-वितरण प्रणाली को तत्काल प्रभावी बनाया जाए। इसके साथ ही राज्य सरकार ने उन तत्वों को कड़ी चेतावनी दी है जो इस संकट की आड़ में कालाबाजारी की फिराक में हैं।

कालाबाजारी करने वालों पर नकेल

खाद की जमाखोरी और डायवर्जन को रोकने के लिए जिला स्तर पर विशेष उड़नदस्ता दलों और निगरानी समितियों का गठन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसानों के हक पर डाका डालने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और गड़बड़ी पाए जाने पर सीधी कानूनी कार्यवाही की जाएगी। साथ ही पीएम किसान पोर्टल से एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन की प्रक्रिया को तेज करने को कहा गया है ताकि खाद और बीज का वितरण सीधे पात्र किसानों तक पहुंच सके। सरकार अब धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन और सुगंधित चावल की किस्मों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।

Chaiपुर
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NU Desk

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