कृषि उत्पादन आयुक्त ने किया हरित खाद और जैव उर्वरकों पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

रायपुर
कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार ने कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों के लिए आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय हरित खाद, नीली-हरी शैवाल एवं जैव उर्वरक रहा। इसका प्राथमिक उद्देश्य आगामी खरीफ सीजन से पूर्व किसानों को रासायनिक उर्वरकों के विकल्पों के प्रति जागरूक करना और सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों की संभावित कमी को ध्यान में रखते हुए हरित खाद और जैव उर्वरक जैसे विकल्प फसलों की पोषक आवश्यकताओं का लगभग 50 प्रतिशत तक हिस्सा पूरा कर सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आगामी दो से तीन महीनों के भीतर इन तकनीकों के उत्पादन और उपयोग की जानकारी को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की आपूर्ति को लेकर उत्पन्न अनिश्चितताओं के बीच छत्तीसगढ़ ने टिकाऊ कृषि की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी संघर्षों के कारण पेट्रोलियम उत्पादों और कच्चे माल के आयात पर होने वाले संभावित प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार ने वैकल्पिक पोषक स्रोतों को बढ़ावा देने की पहल तेज कर दी है।
तकनीकी सत्रों में वैज्ञानिकों ने मृदा स्वास्थ्य और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता के लिए जैविक उपायों पर बल दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, नीली-हरी शैवाल धान की खेती में नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए अत्यंत उपयोगी है, जबकि हरित खाद से मिट्टी की संरचना में सुधार होता है। कार्यक्रम में अधिकारियों को नीली-हरी शैवाल उत्पादन की तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल सहित विभिन्न जिलों के 150 से अधिक कृषि अधिकारी, वैज्ञानिक और कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। प्रशिक्षण के अंत में आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया।




