आर्थिक मोर्चे पर हिमाचल की कड़ी जंग: वीआईपी कल्चर पर लगाम, मुख्यमंत्री से लेकर एसएसपी तक की सैलरी में देरी का फैसला

शिमला। हिमाचल प्रदेश में जारी आर्थिक संकट के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राजनीतिक कार्यपालिका और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन के एक हिस्से को अस्थायी रूप से स्थगित करने की घोषणा की है। यह निर्णय अगले छह महीनों के लिए लागू रहेगा।
वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके स्वयं के वेतन का 50 प्रतिशत, उपमुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों के वेतन का 30 प्रतिशत तथा विधायकों के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा रोका जाएगा। यह कदम राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद राज्य पर बढ़े वित्तीय दबाव को देखते हुए उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था अस्थायी है और वित्तीय स्थिति में सुधार होने पर रोकी गई राशि वापस कर दी जाएगी। यह निर्णय राजनीतिक पदों पर नियुक्त व्यक्तियों और शीर्ष नौकरशाहों पर भी लागू होगा।
बोर्ड और निगमों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सलाहकारों के वेतन में 20 प्रतिशत की देरी की जाएगी। वहीं मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, पुलिस महानिदेशक और अतिरिक्त डीजीपी स्तर के अधिकारियों के वेतन का 30 प्रतिशत हिस्सा स्थगित रहेगा।
इसके अलावा सचिव, विभागाध्यक्ष, आईजी, डीआईजी, एसएसपी और समकक्ष अधिकारियों के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा रोका जाएगा, जबकि ग्रुप ए और ग्रुप बी अधिकारियों के वेतन में छह माह के लिए 3 प्रतिशत की देरी होगी। ग्रुप सी और ग्रुप डी कर्मचारियों को इस निर्णय से छूट दी गई है और उन्हें पूरा वेतन मिलता रहेगा।
सरकार ने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कुछ राहत घोषणाएं भी की हैं। अस्थायी मेडिकल अधिकारियों का मासिक वेतन 33,600 रुपए से बढ़ाकर 40,000 रुपए किया गया है। स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और ऑपरेशन थिएटर टेक्नीशियन का वेतन एक समान करते हुए 25,000 रुपए तय किया गया है।
इसके साथ ही दैनिक वेतनभोगियों की मजदूरी में 25 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1,000 रुपए प्रति माह की वृद्धि की गई है, जबकि मिड-डे मील कर्मियों सहित अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों को 500 रुपए अतिरिक्त मासिक राशि देने की घोषणा की गई है।



