पूर्वोत्तर को मिलेगी नई ‘लाइफलाइन’: ब्रह्मपुत्र के नीचे सुरंग से 6 घंटे का सफर अब सिर्फ 30 मिनट में

असम में गोहपुर को नुमलिगढ़ से जोड़ने के लिए ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे विश्वस्तरीय अंडरवाटर रोड-रेल सुरंग बनाने की तैयारी की जा रही है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 18,600 से 19,000 करोड़ रुपये बताई गई है और केंद्रीय कैबिनेट से जल्द मंजूरी मिलने की संभावना है।
यह देश की पहली ऐसी सुरंग होगी जिसमें सड़क और रेल दोनों की व्यवस्था होगी। योजना के तहत नदी के नीचे दो अलग-अलग ट्यूब बनाए जाएंगे, एक सड़क यातायात के लिए और दूसरा रेल लाइन के लिए। अभी नदी पार करने में नाव या पुल के जरिए 4 से 6.5 घंटे लगते हैं, जबकि सुरंग बनने के बाद यह समय घटकर लगभग 30 मिनट रह जाएगा।
सुरंग पानी के नीचे होने के कारण बाढ़, बारिश या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी संचालित रह सकेगी। इससे सामान, फल-सब्जियां, चाय और अन्य उत्पाद तेजी से पहुंच सकेंगे तथा पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। ट्रक और ट्रेन सीधे नदी पार करेंगे, जिससे परिवहन लागत और दूरी दोनों कम होंगे। बेहतर कनेक्टिविटी से निजी निवेश और उद्योग स्थापित होने की संभावना भी बढ़ेगी।
असम की सीमाएं चीन, बांग्लादेश और म्यांमार से लगती हैं, इसलिए परियोजना को रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आपात स्थिति में सेना और उपकरण कम समय में नदी पार कर सकेंगे। पुलों को बाढ़ या हमले से नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है, जबकि सुरंग अधिक सुरक्षित विकल्प मानी जा रही है।
पूर्व बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी ने कहा कि यह परियोजना पूर्वोत्तर को देश की मुख्यधारा से जोड़ने वाली रणनीतिक जीवनरेखा साबित होगी।
परियोजना को पूर्वोत्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने की व्यापक योजना का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें सड़क, रेलवे और जलमार्ग के वैकल्पिक मार्ग शामिल हैं। इसके पूरा होने से उद्योग, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा रक्षा और विकास दोनों क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी।



