इंजीनियरिंग का ‘अजूबा’: टावर हटाए बिना ही नगर निगम ने बना दी सड़क, एंबुलेंस और दमकल के लिए रास्ता बंद

भोपाल। झीलों की नगरी भोपाल अब ‘अजूबों का शहर’ बनती जा रही है। 90 डिग्री के टर्न वाले पुल और ‘ठिगने’ मेट्रो स्टेशन के बाद अब करोंद क्षेत्र की विनायक कॉलोनी में सड़क के बीचों-बीच खड़ा हाईटेंशन टावर सुर्खियों में है। यह बिजली विभाग और नगर निगम की इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना है, जो न केवल ट्रैफिक में रोड़ा बन रहा है, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए भी बड़ा खतरा साबित हो रहा है।
इस टावर को वर्षों पहले स्थापित किया गया था, जब इस क्षेत्र में आबादी कम थी, लेकिन जैसे-जैसे क्षेत्र का विकास हुआ, सड़क का निर्माण टावर के नीचे से किया गया। बारिश के मौसम में इस टावर से करंट फैलने का खतरा बना रहता है। टावर के नीचे से गुजरने वाले लोग अपनी जान जोखिम में डालकर निकलते हैं। इसके अलावा, सड़क के बीच में स्थित इस टावर के कारण एंबुलेंस, दमकल या अन्य भारी वाहनों का गुजरना लगभग असंभव हो गया है। रात के समय यह टावर अनजान वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
हैरानी की बात यह है कि इस लापरवाही को देखने के लिए शहर के अन्य हिस्सों से लोग आ रहे हैं। कुछ लोग इस ‘एफिल टावर’ के पास खड़े होकर सेल्फी ले रहे हैं, तो कुछ सोशल मीडिया पर बिजली विभाग की आलोचना कर रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया ने मौके पर पहुंचकर सरकार पर निशाना साधा और कहा, “भोपाल अब अजूबों का शहर बन गया है। पहले 90 डिग्री पुल, फिर ठिगना मेट्रो स्टेशन और अब यह खतरों का टावर। यह दिखाता है कि सरकार पूरी तरह से सो रही है। बिजली विभाग को इस टावर को तुरंत शिफ्ट करना चाहिए।”
सूत्रों के अनुसार, बिजली विभाग का कहना है कि घनी आबादी के कारण टावर को शिफ्ट करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। लेकिन सवाल यह है कि जब टावर पहले से खड़ा था, तो नगर निगम ने इसके नीचे सड़क बनाने की अनुमति कैसे दी?



