बजट में एसटीटी वृद्धि से शेयर बाजार में भारी गिरावट, छह साल में सबसे बड़ा नुकसान

मुंबई। केंद्रीय बजट में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में बढ़ोतरी और बायबैक टैक्स में इजाफे की घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण के बाद बाजार का रुख अचानक नकारात्मक हो गया और निवेशकों को भारी घाटे का सामना करना पड़ा। बजट वाले दिन पिछले छह वर्षों में यह शेयर बाजार की सबसे बड़ी गिरावट रही।
दिन के कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 2,370 अंकों की भारी गिरावट के साथ 80,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 79,899 पर आ गया था। वहीं, निफ्टी में भी 749 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, कारोबार के अंतिम घंटों में मामूली सुधार देखा गया और सेंसेक्स 1,546.84 अंक गिरकर 80,722.94 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 495.20 अंकों की गिरावट के साथ 24,825.45 के स्तर पर बंद हुआ।
बाजार में इस भारी बिकवाली का मुख्य कारण फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) सेगमेंट में एसटीटी बढ़ाने का प्रस्ताव रहा। वित्त मंत्री ने सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से फ्यूचर्स पर टैक्स 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.15 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव रखा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ने से विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भागीदारी कम हो सकती है और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
बिकवाली के इस दौर में बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप करीब 9.40 लाख करोड़ रुपये घट गया। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, अडानी पोर्ट्स, टाटा स्टील और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े शेयरों में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई। हालांकि, आईटी और फार्मा क्षेत्र के कुछ शेयरों जैसे टीसीएस, इंफोसिस और सन फार्मा में मामूली तेजी दर्ज की गई। बाजार का कुल रुख नकारात्मक रहा, जहां गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों के मुकाबले काफी अधिक रही।

