संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश: अगले वित्त वर्ष में 7.2 प्रतिशत तक रह सकती है विकास दर

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार, 29 जनवरी को लोकसभा में देश का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। इस रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का दावा करते हुए अनुमान जताया गया है कि वित्त वर्ष 2026-2027 में जीडीपी ग्रोथ 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत की रेंज में रह सकती है। वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार स्थिर बनी हुई है।
महंगाई और कृषि की स्थिति
सर्वेक्षण के अनुसार, आने वाले वर्ष में महंगाई दर 4 प्रतिशत के तय लक्ष्य के दायरे में रहने की उम्मीद है। दिसंबर 2025 में आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के लिए महंगाई दर का अनुमान घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया था। वहीं, वित्त वर्ष 2027 की पहली दो तिमाहियों में इसके 3.9 से 4 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। खेती के क्षेत्र में सुधार दिख रहा है और वित्त वर्ष 2026 में कृषि विकास दर 3.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। वर्ष 2024-25 में अनाज की पैदावार 3,320 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर रही है।
रोजगार और नई नौकरियां
रोजगार के मोर्चे पर रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल-जून 2025 के दौरान देश में 15 साल से अधिक उम्र के 56.2 करोड़ लोग रोजगार में थे। वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही में करीब 8.7 लाख नई नौकरियां पैदा हुई हैं। औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में भर्तियों में तेजी आई है और गिग वर्क भी कमाई का बड़ा जरिया बनकर उभरा है। युवाओं की कुशलता बढ़ाने के लिए स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनिंग देने का सुझाव भी दिया गया है।
राजकोषीय घाटा और विदेशी मुद्रा भंडार
सरकार ने राजकोषीय घाटे को कम करने का लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लिया है। वित्त वर्ष 2025 में यह जीडीपी का 4.8 प्रतिशत रहा, जबकि 2026 के लिए 4.4 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़कर 701 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो 2023-24 में 668 बिलियन डॉलर था। भंडार में यह बढ़ोतरी डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूती प्रदान करेगी।
निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि
दुनिया भर में व्यापारिक अनिश्चितता के बावजूद भारत का कुल निर्यात (वस्तु एवं सेवा) वित्त वर्ष 2025 में 825.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने के बाद भी अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान वस्तु निर्यात में 2.4 प्रतिशत और सेवा निर्यात में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत ने व्यापारिक निर्भरता कम करने के लिए यूरोपीय संघ के साथ ट्रेड डील फाइनल की है और ब्रिटेन व न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ भी नए समझौते किए हैं।



