गरियाबंद : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिरकट्टी धाम में धर्मध्वजा स्थापित की, समरसता भवन के लिए 50 लाख रुपये की घोषणा

गरियाबंद। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को सिरकट्टी धाम आश्रम स्थित श्रीरामजानकी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। उन्होंने मंदिर के सर्वोच्च शिखर पर धर्मध्वजा की स्थापना की तथा आश्रम को सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण एवं आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बताते हुए समरसता भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद देश में उत्पन्न आध्यात्मिक चेतना की अखंड धारा का विस्तार सिरकट्टी धाम में धर्मध्वजा स्थापना के रूप में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म को केवल आस्था नहीं, बल्कि कर्तव्य के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि प्रभु श्रीराम ने वनवास काल का अधिकांश समय यहीं व्यतीत किया। दंडकारण्य के रूप में विख्यात अबूझमाड़ क्षेत्र नक्सलवाद से तेजी से मुक्त हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के तहत अब तक 39 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को निशुल्क अयोध्या यात्रा कराई गई है तथा मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा दर्शन योजना से पांच हजार से अधिक श्रद्धालु लाभान्वित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के पांच शक्तिपीठों का विकास कार्य प्रगति पर है। भोरमदेव क्षेत्र के समग्र विकास के लिए स्वदेश दर्शन योजना के तहत 148 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं तथा रतनपुर विकास प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। राजिम कल्प-कुंभ का आयोजन भी इस बार भव्य रूप में होगा।
मुख्यमंत्री ने श्रीरामजानकी मंदिर के भव्य स्वरूप को जनसहभागिता का अनुपम उदाहरण बताया। लगभग 22 हजार परिवारों के सहयोग से 9 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह मंदिर 10 वर्षों की तपस्या का परिणाम है। राजस्थान के शिल्पियों द्वारा पारंपरिक शैली में बिना सीमेंट एवं छड़ के निर्मित इस मंदिर की आयु लगभग एक हजार वर्ष आंकी गई है। उन्होंने सभी दानदाताओं एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया तथा इसे छत्तीसगढ़ की आस्था एवं एकजुटता का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने धर्मध्वजा रोहण को ऐतिहासिक क्षण करार दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल परंपरागत ध्वजारोहण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में धर्म, अध्यात्म एवं सामाजिक समरसता की स्थापना का प्रतीक है।



