संघर्ष से स्वर्णिम सफलता तक: योगिता मण्डावी ने जूडो में रचा राष्ट्रीय इतिहास, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से हुई सम्मानित

रायपुर. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कोंडागांव जिले के ग्राम हिर्री की बालिका योगिता मण्डावी ने विपरीत परिस्थितियों को परास्त करते हुए जूडो खेल में राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय पहचान बनाई है। उनकी इस उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए नई दिल्ली में देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने योगिता मण्डावी को बधाई देते हुए कहा कि योगिता प्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बालिकाओं के संरक्षण, शिक्षा एवं खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और योगिता की सफलता इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम है।
योगिता मण्डावी का जन्म 01 जनवरी 2011 को कोंडागांव जिले के ग्राम हिर्री में हुआ। अल्पायु में माता-पिता के निधन के बाद वे जिला प्रशासन के सहयोग से वर्ष 2021 में छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद के बालगृह बालिका, कोंडागांव में आईं। वर्तमान में वे स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय, कोंडागांव में कक्षा 9वीं की छात्रा हैं और मात्र 10 वर्ष की आयु से जूडो का प्रशिक्षण ले रही हैं।
योगिता ने वर्ष 2024 में राज्य स्तरीय शालेय जूडो प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल, खेलो इंडिया क्षेत्रीय व राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सिल्वर मेडल तथा वर्ष 2025 में राज्य स्तरीय ओपन प्रतियोगिता में गोल्ड और राष्ट्रीय ओपन जूडो प्रतियोगिता (हैदराबाद) में ब्रांज मेडल जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया है। वर्तमान में वे स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, भोपाल में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
योगिता मण्डावी की सफलता यह प्रमाणित करती है कि सही अवसर और मार्गदर्शन से बालिकाएं किसी भी चुनौती को पार कर राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल कर सकती हैं।



