भगवान बलराम जयंती पर कृषक सम्मेलन : किसानों को मिला जैविक खेती और नवाचार का संदेश…

रायपुर। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री राम विचार नेताम ने आज भगवान श्री बलराम जयंती (कृषक दिवस) के अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कृषक सभागार में आयोजित कृषक सम्मेलन में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने किसानों और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान बलराम खेती-किसानी के देवता माने जाते हैं। ऐसे में यह दिन किसानों के लिए गौरव और प्रेरणा का अवसर है।
किसानों को मिला उन्नति का संदेश...
मंत्री नेताम ने किसानों से जैविक खेती अपनाने और देशी किस्मों के संरक्षण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “किसान समृद्ध होंगे तो प्रदेश और देश दोनों ही खुशहाल होंगे।” इस मौके पर उन्नत किसानों को विभागीय योजनाओं के तहत अनुदान राशि के चेक और कृषि उपकरण भी वितरित किए गए। सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, तिलहन उत्पादन और गो-आधारित कृषि व्यवसाय जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

आधुनिक खेती और आय वृद्धि पर जोर...
मंत्री नेताम ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्राकृतिक खेती और पशुपालन का समन्वय जरूरी है। उन्होंने कम पानी और कम खाद में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों, साथ ही फूलों, फलों, मसालों और औषधीय खेती को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय किसानों को तकनीकी, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं।
राज्य सरकार की प्रतिबद्धता...
कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने किसानों से जैव विविधता की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मेहनत और तकनीक के सहयोग से किसान अपनी समृद्धि सुनिश्चित कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को वाजिब दाम पर धान खरीदकर सम्मान दे रही है।

विशेषज्ञों की राय...
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक और जैविक खेती से उत्पादन लागत घटती है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। साथ ही तिलहन फसलों को बढ़ावा देने से खाद्य तेल आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है। गो-आधारित कृषि व्यवसाय को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बताया गया।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में किसान शामिल...
इस मौके पर कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार, विश्वविद्यालयों के कुलपति, कृषि वैज्ञानिक, विभिन्न किसान संगठन और प्रदेशभर से आए किसान बड़ी संख्या में शामिल हुए। किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए और कहा कि जैविक विधियों से खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन रही है।