Korba

गजब की नाली निर्माण: 7 सौ मीटर के निर्माण पर 15 लाख खर्च के बाद भी 3 वर्ष से अधूरा, सरपंच- सचिव ने मिलकर 14वें- 15वें वित्त की राशि से खेला खेल…

सरपंच- सचिव के कारगुजारी का पुलिंदा लेकर ग्रामीण करेंगे कलेक्टर से शिकायत...

कोरबा/पाली-कोरबी। पंच के दिल में ख़ुदा बसता है, शायद इसीलिए मुंशी प्रेमचंद ने अपनी कहानी का शीर्षक “पंच परमेश्वर” रखा रहा होगा। लेकिन अब पंच “परमेश्वर” नही रहे। मुंशी प्रेमचंद की कहानी पंच परमेश्वर में जब जुम्मन मिया की पत्नी और उसकी खाला के साथ अनबन हो जाता है तब जुम्मन का लंगोटिया अलगू ही पंच बनकर न्याय की मिसाल कायम करता है। लेकिन कहानी और वास्तविकता में जमीन आसमान का फर्क होता है।

अब के पंच ना तो अलगू की तरह होते हैं और न ही कोई सरपंच परमेश्वर। प्रस्तुत उदाहरण किसी भी आम या खास जनप्रतिनिधि के लिए नहीं कही गई है बल्कि मौजूदा सिस्टम की व्यवस्था के मद्देनजर यह बात जनता के द्वारा इन दिनों फरमाई जाती है। हालांकि देश में ईमानदार जनप्रतिनिधियों की कमी नही है जिसके बाद जनता के मन इस तरह से धारणा बने रहना निश्चित तौर पर चिंता का विषय है।

पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत ग्राम पंचायत को लोकशाही का प्रथम सोपान माना गया है, जिसके दायरे में रहकर ग्रामीण अंचल क्षेत्रों के लोग शासन और प्रशासन तक अपनी बात व मांग को प्रमुखता से रखते है। ग्रामीण अंचल क्षेत्रों में रहने वाले जनता के लिए ग्राम पंचायत ही एकमात्र ऐसी जगह है, जहां नागरिकों को उनकी मौलिक अधिकारों से संबंधित जानकारी एवं सरकार के द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ मिलता है।

ग्राम पंचायत में लोकशाही की अहमियत बरकरार रखने हेतू ग्रामीण जनता पंचायत सदस्यों का चयन कर अपना सेवक चुनते है। चुने गए लोगों को ग्रामीण जनता, पंच या सरपंच की उपाधि से नवाजते हुए उनके नेतृत्व में सम्पूर्ण ग्राम की विकास पर कार्य किया जाता है। विडंबना यह है कि आज के वर्तमान परिदृश्य में पंच और सरपंच अपनी मूल जिम्मेदारियो से दूर जाते हुए स्वार्थ की सिद्धी में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे है।

स्वार्थ सिद्धि में आगे रहने के चलते आज के मौजूदा परिस्थिति में कोरबा जिला अंतर्गत कई ग्राम पंचायत में निवासरत आम जनता पंच और सरपंच को परमेश्वर की उपाधि देने के बाद भी उन पर भरोसा करने को तैयार नहीं है, जिसका प्रमाण जिले के पाली विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोरबी में देखने को मिल रहा है। जहां की सरपंच श्रीमती संतोषी बाई द्वारा यहां के कार्यभार सम्हालने वाले सचिव गिरीशचंद्र कश्यप के साथ मिलकर एक ऐसे गजब के नाली का निर्माण कराया जा रहा है, जिसके निर्माण पर 14वें- 15वें वित्त मद से लगभग 15 लाख खर्च बताने के बाद भी उक्त 7 सौ मीटर की नाली निर्माण गत 3 वर्ष से अधूरा है।

झालापारा मोहल्ला में हायर सेकेण्डरी स्कूल के समीप से लेकर कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य की आड़ में सरपंच- सचिव ने जिस हिसाब से लाखो रुपए की राशि आहरण की है, अधूरे नाली की लंबाई व गुणवत्ता को लेकर निर्माण की खर्च राशि यहां के लोगों के गले नही उतर रही। जिस हिसाब से सरपंच- सचिव ने नाली निर्माण के नाम पर पंचायत मद के भारी भरकम राशि का आहरण किया है उसके अनुसार 14वें वित्त से दिनांक 2 जून 2020 को 1 लाख 50 हजार, 8 जुलाई- 1 लाख, 30 जुलाई- 1 लाख 50 हजार, 25 अगस्त- 90 हजार 56 रुपए, 14 सितंबर- 50 हजार, 12 नवंबर- 40 हजार, 29 नवंबर- 2लाख, 30 नवंबर- 2 लाख की राशि आहरित की गई है। इसी प्रकार 15वें वित्त से 12 अप्रैल 2021 को 90 हजार, 22 जुलाई- 1 लाख 10 हजार, 30 जुलाई- 1 लाख, 4 अगस्त- 84 हजार 6 सौ 30 रुपए व 5 मई 2022 को 1 लाख 32 हजार की आहरण राशि का जियोटैग में खुलासा हुआ है।

इस प्रकार सरपंच- सचिव ने 7 सौ मीटर नाली के अधूरे निर्माण पर 14 लाख 96 हजार 6 सौ 30 रुपए की राशि निकाली है, जो इनके भ्रष्ट्राचार को उजागर करता है। मामले को लेकर यहां के ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत द्वारा बनाए जा रहे नाली निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी तो की गई है साथ ही जिसके निर्माण के नाम पर लाखों रुपए की राशि निकाल ली गई, जबकि निर्माण अभी भी अधूरा ही पड़ा हुआ है, जिसे देखकर लगता है कि आहरित राशि का आधा भी खर्च नही हुआ होगा। ग्रामीणों ने सरपंच- सचिव के कारगुजारी की शिकायत कलेक्टर से करने की ठानी है।

यहां की सरपंच ने सचिव से मिलीभगत एवं सांठगांठ कर शासकीय भवन साफ- सफाई, रंग- रोगन, मरम्मत कार्य कराने के नाम पर मूलभूत व 14वें, 15वें वित्त मद की राशि पर जमकर डांका और फर्जी बिल बाउचर के सहारे लाखों का वारा न्यारा किया गया। जिसे भी खबर के माध्यम से जल्द सामने लाया जाएगा।

Abhishek Kaushik

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