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International yoga day: योग से शारीरिक और मानसिक विकास संभव…

कवयित्री, सरोज कंसारी
नवापारा राजिम
जिला-रायपुर (छ. ग.)

प्रकृति की गोद में मनुष्य के सर्वांगीण विकास की सभी वस्तुएं उपलब्ध हैं जिससे शारीरिक मानसिक,आत्मिक सुख संभव है यह निःशुल्क प्राप्त होती हैं प्रकृति में ही अनमोल रत्नों की खान हैं इस सृष्टि में ,प्रकृति की सुंदरता उसका सानिध्य सहज ही हमें आकर्षित करती हैं सभी अपने जगह पर अटल हैं समयानुसार कार्य को गति देते हैं।

बिना थके हमें वो सब कुछ समर्पित करते हैं जो जीवन के लिए अति आवश्यक हैं। ऊंचे-ऊंचे पर्वत पहाड़ महान साधु-संतों ऋषि मुनियों की तपिभूमि हैं जिनके साये में त्याग तपस्या ध्यान कर वे सिद्धि प्राप्त किये हैं।निर्मल नदिया हमारी अतृप्त आत्मा को तृप्त करती हैं जंगल-झाड़ी से शुद्ध हवा फल-फूल औषधि लकड़ी छाया मिलती हैं चाँद शीतलता और सूर्य हमें रोशनी देते हैं धरती माता सभी प्राणियों का भार वहन कर हम पर अनंत उपकार करती हैं। बुजुर्गों का कहना हैं -प्रकति के सानिध्य में जो मानसिक ऊर्जा हमें मिलता हैं वो और कहीं भी नही मिलता।

जन्म से लेकर मरण तक हर क्रियाकलाप में प्रकति हमारे साथ ही रहती हैं,लेकिन हम क्या करते हैं ?अपने स्वार्थ से वशीभूत होकर इनका दोहन करते हैं आधुनिकता के अनुसरण में ही लिप्त होकर खुले आसमान में रहने की बजाय कूलर पंखा ए.सी, में रहकर अपने शरीर में हम आलस भर लेते हैं।

शुद्ध हवा कहाँ से मिलेगा? अपने पर्यवरण को खुद प्रदूषित करते हैं। प्राकृतिक चीजो का उपयोग न कर मैगी पिज्जा बर्गर चौमिन का नाश्ता करते हैं,जड़ी-बूटी का उपयोग करने की बजाय केमिकलयुक्त विषाक्त गोली दवाई इंजेक्शन लगवाते हैं जिससे हमारे शरीर को बहुत नुकसान होता हैं।दिनभर की भागदौड़ के बाद अपने लिए समय नही निकाल पाते ध्यान चिंतन मनन के लिए। इसलिए आज हर एक व्यक्ति किसी न किसी रूप में मानसिक शारीरक बीमारियों के शिकार हैं और असमय मौत के आगोश में भी समा जाते है। जब से हम प्रकृति के महत्व की अनदेखा किये तब से अब तक कहीं शांति नही हैं पीड़ित है सभी किसी न किसी दर्द से,जो नियमित दिनचर्या रखते हैं प्रकृति के अनुकूल आचरण करते हैं वे आज के माहौल में भी स्वस्थ और मस्त हैं उन्हें किसी प्रकार की दवा की जरूरत नही होती।

ईश्वर ने मनुष्य की रचना बहुत ही सुनियोजित ढंग से किया हैं जिसमें असीम धैर्य साहस बल बुद्धि समाहित हैं लेकिन सूझबूझ की कमी व आधुनिकता की होड़ में गुम हो जाने के होने के कारण हम ग्रसित हो जाते है मानसिक तनाव के सब कुछ हमारे पास है लेकिन स्वस्थ शरीर नही भौतिक चीजों का उपयोग करने के लिए, तो बाकी सभी बहुमूल्य रत्न भी बेकार हैं । जब मन एकाग्र नही और तकलीफ से भरे हैं तब छप्पन भोग भी अच्छा नही लगता आजीवन हम भागते हैं सिर्फ धन कमाने के लिए और जब उसके उपभोग का समय आता हैं तो शरीर साथ नही देता क्योकि हम मशीन की तरह काम तो करते हैं पर उसके लिए जिन बातों की जरूरत होती हैं उसे अनदेखा कर देते हैं शरीर को भी असमय थकान से बचाने के लिए नई ऊर्जा की जरूरत होती हैं।

नियमित खानपान स्वछता आध्यात्म सात्विक विचार संस्कार शुद्ध आचरण ये सब अति में आवश्यक है शरीर को संचालित करने के लिए जिसका अनुसरण अक्सर हम नही कर पाते हैं
आज के समय में गरीबी बेरोजगारी महंगाई जनसंख्या वृद्धि प्रतिस्पर्धा प्रदूषित वातावरण में जीवन यापन बहुत ही कठिन हो गया हैं आज सबसे बड़ी आवश्यकता है स्वस्थ शरीर एकाग्र मन और कुछ पल की शांति जिसकी तलाश लगभग सभी करते हैं।

जरूरत हैं हमें पुनः प्रकृति की ओर लौटने की जिसके मनोरम वातावरण में सुखद कल्पनाओं को साकार कर आकर्षक सुंदर दृश्य का आनंद लें सकें खुले माहौलमें रहें बनावटी दुनिया से दूर प्राकॄतिक जीवन को अपनाये दौड़ती-भागती जिंदगी से आज अपने लिए समय निकाल पाना संभव नही लेकिन खुद को स्वस्थ रखना हमारी जिम्मेदारी नियमित योग व्यायाम ध्यान धारणा से मन व्यवस्थितऔर शरीर सक्रिय रहता हैं कई बीमारी का ईलाज स्वमेव हो जाता हैं जरूरत है सच्चे व शुद्ध मन से नियमित क्रियाकलापों में योग को सम्मिलित करने की योग समस्त सुखों की केंद्र बिंदु हैं योग का अर्थ होता है जोड़ना आत्मा से परमात्मा तक पहुँचने का मार्ग योग आंतरिक शक्ति है जिसका संबंध अभ्यास और सेहत से है योग अनुशासन हैं जिससे आत्म- शक्ति का विकास होता हैं योग के प्रकार हैं- राजयोग कर्मयोग ज्ञानयोग व धर्मयोग मुख्यतः अष्टांग योग का हम अभ्यास कर नई ऊर्जा और स्फूर्ति प्राप्त कर सकते है जिसमें यम नियम आसन प्राणायम प्रत्याहार धारणा ध्यान और समाधि सम्मिलित है अष्टांग योग में प्राणायाम एक अंग हैं प्राणायाम का अर्थ होता हैं जीवन शक्ति को मजबूत करना,श्वास का विस्तार ही प्राणायाम हैं यह कई प्रकार के होते हैंभस्त्रिका, कपाल भारती,अनुलोम-विलोम भ्रामरी शीतली सीत्कारी व उज्जायी प्राणायम हैं।

भस्रिका प्राणायाम में सुखासन में बैठकर नाक से लंबी साँस फेफड़ो में भरना फिर लंबी साँस छोड़ना।यह प्रक्रिया अपनी क्षमता अनुसार करें इससे हृदय सशक्त बनता हैं, फेफड़े मजबूत होते हैं पैरालिसिस व अन्य व्याधियों को मिटाने में सहायक हैं। कपालभारती में वज्रासन या सुखासन में बैठकर साँस फेकतें समय पेट को अंदर ले जाना हैं और साँस छोड़ते रहना है यह प्रक्रिया जल्दी जल्दी करना है। कपालभारती प्राणायाम लगातार करने से चेहरे की चमक बढ़ती हैं, पेट संबंधित सभी विकार दूर होते है पांच मिनट समय निकाल कर नियमित करे।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम में सुखासन में बैठें नाक का दाँया नथुना अंगूठे की मदद से बंद करे व बायें से लंबी सांस ले फिर बायें से बंद करके दायें वाले से लंबी सांस छोड़ें यह दायां बायां का क्रम दस मिनट करते रहे। इससे नाड़ी शुद्ध होता हैं, हार्ट की ब्लॉकेज खुलती हैं, हाई-लो रक्तचाप ठीक होता हैं मेमोरी बढ़ती हैं। भ्रामरी प्राणायाम में पद्मासन में बैठकर दोनों अंगूठे से कान पूरी तरह बंद करें, दो उंगलियों को आँख पर रखे ,बाकी उंगलियों को माथे पर रखें और लंबी साँस लेते हुए भवरें जैसे आवाज निकाले (म…) इससे माइग्रेन डिप्रेशन, मष्तिष्क संबंधित सभी बीमारी दूर होती हैं,मन शांत होता हैं, एकाग्रता बढ़ती हैं।

कुछ आसन जिसे हम सहजता से कर सकते है जैसे गोमुखासन वृक्षासन वज्रासन शवासन अर्द्धभुजंगासन ताड़ासन और सुखासन योग के लिए कही जाने की जरूरत नही आप घर पर इसका नियमित अभ्यास कर स्वस्थ शरीर रख सकतें हैं आज का युग सोशल मीडिया का है जहाँ योग की सहज जानकारी मिल जाती हैं। कुछ सरल योग आप स्वयं कर सकते है पेट के बल सीधे लेटना ,दोनों पैर के पंजे के बल खड़े होना चिर मुद्रा में बैठना ,दोनों हाथ को ऊपर जोड़कर खड़े होना नेत्र बंद कर दोनों हाथ आगे कर मुठी बांधकर घुमाना मस्तिष्क को उँगली की मदद से सहलाना चेहरे पर हाथ फेरना पैर के अंगूठे को ऊपर नीचे करना नियनित टहलना अपने मन पसंद पर्यटन स्थल पर घूमने जाना मधुर संगीत सुनना आदि।

योग के फायदे को सूचीबद्ध करना संभव नही इसके बहुत लाभ है इससे मन एकाग्र होता है क्रोध से मुक्ति मिलती हैं तनाव दूर होना वजन कम होता हैं मानसिक शांति रक्तप्रवाह सहन शक्ति का विकास होता हैं साथ ही पाचनक्रिया ठीक होती हैं। आत्मविश्वास बढ़ता है बी.पी. शुगर नियंत्रित होता हैं योग एक कला हैं जिससे जीवन मे निखार आता हैं। सकरात्मक ऊर्जा का संचार होता हैं योग एक दिन की प्रक्रिया नहीे नियमित अभ्यास करने से शरीर और मन एकदम सक्रिय हो जाता हैं योग प्राचीनकाल से चलता आ रहा है स्वस्थ शरीर मे ही स्वस्थ मन होता हैं।

अनावश्यक तनाव पालकर आज लोग अनायास ही कई बीमारियों अवसाद से घिर जाते है जो उचित नही हैं छोटीछोटी क्रिया विधि योग व्यायाम ध्यान के द्वारा खुद को मजबूत बना सकते हैं यह जिम्मेदारी खुद की हैं भारत तपोभूमि हैं यहाँ की संस्कृति महान हैं जहां हर कदम पर भाईचारे एकता सौहाद्र का समन्वय देखने को मिलता हैं डॉक्टर भी वर्तमान में सभी को नियमित योग करने की सलाह देते हैं इससे इम्युनिटी सिस्टम बढ़ता हैंएक भयंकर महामारी कोरोना के प्रकोप से बचने के लिए योग ही तो रामबाण साबित हुआ।

21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता हैं तो आइये हम सभी संकल्प लें नियमित योग करने का व अपने आसपास के लोगो को भी जोड़े कुछ पल हम प्रकृति की गोद मे बैठे अपने मन के समस्त कुविचार को त्याग कर संयमित जीवन जीवन व्यतीत करें और मन मस्तिष्क को एकदम शांत रखें अमूल्य जीवन को यूं ही नष्ट न करें कुछ नियम होते है सुंदर स्वस्थ व्यवस्थित रहने के उनका पालन करें और सदैव प्रसन्नचित मुद्रा में रहें कार्य मे व्यस्त रहें निष्क्रिय न रहें अपने माहौल को खुशनुमा बनाये योग ही जीवन का श्रृंगार है योग से दूर होता हैं सभी रोग प्रतिदिन करें योग और स्वस्थ मस्त और रहें सभी व्यस्त।

Tukaram Kansari

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