Raipur

कुटुम्ब न्यायालय का अहम फैसला : पत्नी आयकर दाता व कामकाजी महिला है तो अंतरिमके साथ पूर्ण भरण-पोषण लेने की पात्र नहीं…

पति से पत्नी ने अंतरिम भरण-पोषण के लिए लगाई थी याचिका, प्रथम प्रधान कुटुंब न्यायालय न्यायलय ने पारित किया आदेश...

रायपुर| प्रथम प्रधान कुटुंब न्यायालय ने आज अहम् फैसला पारित किया है जिसमे पत्नी द्वारा अपने पति से अलग होने के बाद भरण-पोषण राशि दिलवाने की याचना किया गया था इस मामले में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओ ने अपनी अपनी आवेदकों के पक्षों को न्यायालय के समक्ष विभिन्न तर्कों, गवाहों व साक्ष्यो के माध्यम से रखा जिसमे न्यायालय ने पाया कि पत्नी अपना भरण पोषण में सक्षम है इस कारण तीन साल पूर्व के मामले में निर्णय पारित कर आवेदिका पत्नी के प्रकरण को खारिज किया साथ ही 15000 मासिक ले रही अंतरिम भरण पोषण के आदेश को भी निरस्त किया।

प्रथम अति प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय रायपुर पीठासीन अधिकारी बृजेन्द्र कुमार शास्त्री के न्यायालय में आवेदिका ओजल सूर उम्र 28 वर्ष पति अभिनव सूर, निवासी – सी 170 , शैलेन्द्र नगर, रायपुर तह व आवेदक अभिनव सूर उम्र 38 वर्ष ” पिता- डॉ. सी.एन. सूर निवासी – 48 / 345 , बैरन बाजार , थाना कोतवाली, रायपुर, तह व जिला रायपुर के आवेदिका श्रीमती ओजल सूर -पत्नी द्वारा धारा 125 01 . दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत अनावेदक पति अभिनव सूर के विरूद्ध प्रस्तुत किया गया है और भरण – पोषण राशि दिलवाने की याचना किया गया है। प्रकरण में दोनों पक्षों ने अलग अलग तर्क प्रस्तुत किए जिसमे आवेदिका श्रीमती ओजल सूर -पत्नी द्वारा आरोप लगाया गया कि अंतरजातीय विवाह के बाद पति अभिनव सूर व परिजनों द्वारा विभिन्न तरह से परेशान किया गया, तबियत ख़राब होने पर अपने मायके जाने के बाद पति अभिनव सूर उसे लेने नहीं आए तथा स्वयं से वापस आने पर भी नहीं अपनाया व बिना किसी कारण के परित्याग कर दिया है|

आवेदिका श्रीमती ओजल सूर ने पति अभिनव सूर से अच्छी खासी मासिक आय होने की जानकारी प्रस्तुत करते हुए भरण-पोषण की मांग किया गया इसी तारतम्य में अनावेदक अभिनव सूर ने अधिवक्ता के माध्यम से जवाबदावा प्रस्तुत किया गया है और स्वीकृत तथ्य के अलावा कूरतापूर्ण व्यवहार करने विषय से इंकार किया है और अभिवचन लिया है कि प्रेम विवाह होने के कारण दोनों परिवारों के इच्छा के अनुरूप विवाह संपन्न हुआ था, आवेदिका विवाह के बाद नौकरी से असंतुष्ट होने के कारण कुछ माह बाद नौकरी को छोड़ दिया । आवेदिका 10 छात्रों को कोचिंग देने लग, जिससे प्राप्त आय को स्वयं खर्च करती थी। आवेदिका अनावेदक के घर में तोड़फोड़ कर उसके हिसाब से घर बनाने तथा उसके हिसाब से घर पर सास – सज्जा के समान लाने की जिद्द करती थी। आवेदिका घर का कोई कार्य नहीं करती थी तथा रोज देर से उठती थी, आवेदिका स्वयं अनावेदक से झगड़ा कर अपने मां एवं भाई को बुलाकर बैग एवं सुटकेस लेकर मायके चली गयी। अनावेदक के कई प्रयासों के बाद भी आवेदिका वापस नहीं आयी। आवेदिका अपने पिता एवं भाई से भी फोन पर गाली – गलौच व धमकी दिलाने लगी। आवेदिका 10-15 लोगों के साथ अनावेदक के घर पर झगड़ा झंझट करने आयी थी। आवेदिका अनावेदक के आफिस पर जाकर बहुत हो हल्ल मचाई थी अनावेदक कुछ माह पूर्व तक स्पर्श आटोमोबाईल मारूति सुजूकी की शोरूम रायपुर में इवेंट्स मैनेजर के पद कार्य कर 30,000 / – रूपये प्राप्त करता था आवेदिका के द्वारा आफिस में हो हल्ला किये जाने के कारण दिनांक 14.10.2017 को नौकरी से निकाल दिया गया।

अनावेदक आज दिनांक तक बेरोजगार है। आवेदिका एमबीए पास है विवाह के पूर्व जनवरी 2017 में आई शेयर एसबी मल्टीमीडिया में नौकरी कर रही थी वर्तमान में आय अर्जित कर रही है अनोदक के करियर पर दाग लग जाने के कारण अन्य जगहों पर भी नौकरी नहीं मिल रही है। तत्संबंध में अनावेदक की ओर से किये गए प्रतिपरीक्षण में इस सुझाव को गलत बताया है कि वह दिशा कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर पदस्थ है और स्वतः बताया है कि वह उस कॉलेज में पढ़ी है और मोटिवेशनल लेक्चर देने जाती है और उस कार्य का कुछ फीस नहीं लेती और यदि फीस लेना चाहे तो 500 रूपये प्रतिदिन ले सकती है। अनावेदक की ओर से एसबी मल्टीमीडिया प्रा . लिमिटेड के द्वारा आवेदिका के कार्य किये जाने संबंधी दस्तावेज प्रदर्श डी . 1 जो कि आफर लेटर प्रस्तुत किया है जो कि 03.01.2017 का है जिसमें आवेदिका को 2,28,000 / – रूपये वार्षिक वेतन पर नियुक्ति दिये जाने संबंधी आफर लेटर है, कालेज में कार्यरत है जिससे वह आय प्राप्त करती है और आयकर दाता भी है और आयकरदाता होने से यह उपधारणा की जावेगी कि वह इतनी आय प्राप्त करती है कि वह स्वयं का भरण पोषण करे में सक्षम है। इस प्रकार आवेदिका स्वयं का भरण पोषण करने में असमर्थ प्रमणित करने में असफल रही। फलस्वरूप विचारणीय प्रश्न कं . 02 का निष्कर्ष ” प्रमाणित नहीं ” में दिया जाता है। विचारणीय प्रश्न कं . 03- वाद व्यय एवं सहायता 15 . आवेदिका अपना भरण पोषण करने में असमर्थ है , प्रमाणित करने में असफल रही। अतः आवेदिका की ओर से प्रस्तुत आवेदन अंतर्गत धारा 125 दंप्रसं , का खारिज किया जाता है।

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